पूर्वोत्तर में अस्तित्व बचाने के लिए जूझ रही है कांग्रेस, भाजपा के धारदार प्रचार का भी असर

खबरें अभी तक। पूर्वोत्तर के तीन राज्यों त्रिपुरा में जहां मतदान 18 फरवरी को होना है, वहीं मेघालय और नागालैंड में 27 फरवरी को उम्मीदवारी की किस्मत इवीएम में कैद हो जाएगी। इन तीनों राज्यों में के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। भाजपा तीन में से दो राज्यों में मुख्य मुकाबले में है। पूर्वोत्तर में कांग्रेस का खिसकता जनाधार बीजेपी के लिए वरदान बनता दिख रहा है। भाजपा ‘मोदी मैजिक’ की रणनीति के तहत काम कर रही है। त्रिपुरा में मानिक सरकार को सत्ता से बाहर करने के लिए भाजपा जीतोड़ कोशिश कर रही है। अंतिम चरण में पहुंच चुके प्रचार को और धारदार बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को दो चुनावी जनसभाओं को संबोधित करेंगे।

पूर्वोत्तर कभी कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के उभार के बाद अब कांग्रेस पर संकट के बादल अब इन राज्यों में मंडरा रहे हैं। सियासत ने ऐसी करवट ली कि कांग्रेस के हाथ से असम और मणिपुर निकल गया। अब पार्टी मेघालय में अपनी सत्ता बचाए रखने के लिए कवायद कर रही है। इसके अलावा नागालैंड में कांग्रेस की सियासी हालत बहुत ही खराब नजर आ रही है।मेघालय में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह शुक्रवार को जोवाई और मल्की ग्राउंड पर जनसभा को संबोधित करेंगे।

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