दीवार फांदकर कैंप में घुसे थे आतंकी, क्या अवैध निर्माण है सुंजवां में हमले की वजह?

खबरें अभी तक। जम्मू के सुंजवां आर्मी कैंप में 15 साल बाद एक बार फिर से हुए आतंकी हमले में आंतकी कामयाब न हुए होते, अगर सुरक्षा से जुड़े खामियों को पहले ही दूर कर लिया जाता और कैंप के पास अवैध कब्जा नहीं होता.

4 दिन पहले हुए आतंकी हमले की शुरुआती जांच में जो तथ्य सामने आए हैं उससे यही साबित होता है कि इस हमले में शामिल आतंकवादियों ने आर्मी कैंप के पिछवाड़े में बने एक मकान से छलांग लगाकर सैन्य क्षेत्र में प्रवेश किया था.

पास बने मकानों ने आतंकियों की राह की आसान

दरअसल, जिस जगह पर सुंजवां आर्मी कैंप के रिहायशी फ्लैट बने हैं, उसी के सटे कई अवैध मकान भी बना लिए गए हैं. इन मकानों और सैन्य स्टेशन की कांटेदार तार वाली दीवार के बीच भी कोई फासला नहीं बचा है.

अवैध तरीके से बनाए गए मकान और कांटेदार तार वाली दीवार एक-दूसरे से सटे हुए हैं. कई जगहों पर मकान दीवार से ऊंचे हैं जहां से आसानी से कूदकर दूसरी जगह पहुंचा जा सकता है.

सूत्रों के मुताबिक जैश से ताल्लुक रखने वाले हथियारबंद उग्रवादी ने अंधेरे का फायदा उठाते हुए दीवार से कूद गए और उन्होंने वहीं से ग्रेनेड फेंक कर सीधे रिहाइशी घरों पर हमला बोल दिया.

लाखों में बिक रहे हैं अवैध प्लॉट

जम्मू के सैन्य स्टेशन पर हुए आतंकी हमले के लिए ये मकान जिम्मेदार हैं जिन्हें वर्क्स ऑफ डिफेंस एक्ट 1903 की धारा 7 का उल्लंघन करके बनाए गए हैं. इस नियम के तहत सेना क्षेत्र से सटे सौ मीटर की दूरी तक कोई भी निर्माण कार्य नहीं कराया जा सकता.

 यहां तक की पहले से बने मकानों की मरम्मत करने के लिए भी संबंधित जनरल ऑफिसर कमांडिंग की इजाजत लेना जरूरी है. इस कानून के तहत 100 मीटर की दूरी तक कोई निर्माण कार्य करना तो दूर आप निर्माण सामग्री जैसे रेत बजरी आदि भी नहीं रख सकते, लेकिन जम्मू के सुंजवां सैन्य स्टेशन की कांटेदार तार के साथ भूमाफियाओं का कब्जा है.

भूमाफिया अति संवेदनशील कांटेदार तार वाली दीवार के साथ सटी जमीन को चार लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से प्लॉट बेच रहे हैं जो न केवल गैरकानूनी है बल्कि देश की सुरक्षा के लिए खतरनाक भी है.

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